चरचा मांय है...
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किरण राजपुरोहित नितिला ( जोधपुर ) खुद के विषय में कहती हैं- छोटी छोटी खुशियां जो अनमोल है , बस वही तो सही जिंदगी है उन में से एक यह ब्लॉ ग. ...
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नंद भारद्वाज कहते हैं- पिछले चार दशक से मैं हिन्दी और राजस्थानी में अपने लेखन-कार्य से जुड़ा हूं, लेकिन आज भी हर नयी रचना एक शुरूआत लगती है...
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नरेन्द्र व्यास लिखते हैं - वैसे तो मैं अपने आपको कोई लेखक नहीं मानता हां, थोडा बहुत लिख लेता हूं | हाँ, कुछ रचनाएँ कृत्या, सृजनगाथा कुछ मेग...
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मदन गोपाल लढ़ा हिंदी अर राजस्थानी दोनूं भासावां में लिखै । गुजराती अर हिंदी सूं राजस्थानी नै राजस्थानी सूं हिन्दी मांय खूब अनुवाद ई करि...
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पुखराज जाँगिड राजस्थानी खातर मन मांय घणी पीड़ राखै कै भाषा नै आपरो पूरो पूरो सम्मान मिलै । साहित्य अर साहित्यकारां सूं आपरो लांठो जुड़ाव रैय...
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आज री राजस्थानी में सगळां सूं बेसी जवान भाई दुलाराम इण खातर है कै बै ब्लॉग जगत में अर अंतर-जाल रै आंगणै राजस्थानी नै ऊभी करण में हरावळ रैया ...
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राजेन्द्र स्वर्णकार अपने बारे में लिखते हैं - मोम हूं , यूं ही पिघलते एक दिन गल जाऊंगा फ़िर भी शायद मैं कहीं जलता हुआ रह जाऊंगा... मूलतः काव...
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शिवराज गूजर का जन्म राजस्थान, टोंक जिले के एक छोटे से गांव में हुआ । आपकी आठवीं तक गांव में ही पढाई हुई। दसवीं अजमेर जिले में नसीराबद से औ...
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श्री हरीश बी. शर्मा कहते हैं- मरुगंधा के मार्फ़त आप का सामना करने कि कोशिश नए सिरे से है. हालाँकि अंतरजाल की दुनिया में अरसा होने आया है...
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सुनील गज्जाणी की राजस्थानी में पुस्तक “ ओस री बूंदा ” प्रकाशित हुई है । आप ब्लॉग जगत में सक्रिय हैं साथ ही विविध विषयों के जानकार भी है, इ...





